Monday, September 22, 2008

उनके हाथ परमाणु बम आ गया तो ?


एक कहावत है, बोया पेड़ बबूल का फ़िर आम कहाँ से आए. पाकिस्तान पर ये एकदम सटीक बैठती है. हमारा पडौसी देश जल रहा है. जिस तरह की तबाही वहां देखने को मिल रही है, उससे आम पाकिस्तानी ही नही, दक्षिण एशिया के बाकी देश भी हिलकर रह गए हैं. नए चुने गए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी भले ही हुंकार भरें कि वे आतंकवाद को पाकिस्तान की जमीन से उखाड़ फेंकेंगे, परन्तु वास्तविकता यही है कि बेनजीर की निर्मम हत्या के बाद से न केवल वहां के तमाम नेता बेहद खौफ खाए हुए हैं बल्कि आम आदमी भी ख़ुद को असुरक्षित महसूस करने लगा है. पाँच सितारा होटल मेरियट में हुए अब तक के सबसे बड़े और खतरनाक धमाके से पाकिस्तान की छवि विश्व जगत में और भी ख़राब हुई है. अलकायदा समर्थित आतंकियों की करतूत से फ़िर यह साबित हुआ कि पाकिस्तान की जमीन आतंकियों की पनाहगाह बनी हुई है. जैसी कि खबरें वहां से आ रही हैं, उनके निशाने पर आसिफ अली जरदारी थे. वे संसद को उड़ना चाहते थे. अभी पिछले सप्ताह ही वहां के प्रधानमंत्री गिलानी को निशाना बनने की कोशिशें की गयी थीं. इससे साफ है कि न केवल पाकिस्तान, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के हालत बेहद खतरनाक मोड़ लेते जा रहे हैं.
पाकिस्तान ही नहीं पूरा भारतीय उपमहाद्वीप बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है. खुदा न खास्ता अलकायदा के हाथों अगर परमाणु बम लग गया या उसने बम बनाने की तकनीक हासिल कर ली तो इसके भयंकर परिणामों की आप और हम कल्पना भी नहीं कर सकते. जिस तरह अलकायदा अपने मंसूबों में कामयाब हो रहा है, लगता है कि वह परमाणु बम भी विकसित कर ही लेगा. आतंकवादी संगठन इंसानी जानों से ही नहीं खेल रहे हैं, वे मानवता का खून भी कर रहे हैं. लोकतान्त्रिक व्यवस्था को ध्वस्त करने में लगे हैं. वे पढ़े लिखे समाज और दुनिया के दिलों-दिमाग में आतंक पैदा करके उसे कुंद कर देने की खतरनाक साजिश रच रहे हैं. जब शान्ति भंग होती है तो विकास अपने आप रुक जाता है. अगर शान्ति और तरक्की पसंद समाज और दुनिया को मानसिक तौर पर अपंग बनने में इन ताकतों को कामयाबी मिल गयी तो समझ लीजिए कि हालात कितने खतरनाक हो सकते हैं.
भारत पिछले दस वर्षों से पूरी दुनिया को चेताने की कोशिश कर रहा है कि पाकिस्तान के हुक्मरान बेहद खतरनाक खेल खेल रहे हैं. वे दहशतगर्दी के बीज बो रहे हैं. पाकिस्तान में आतंकवाद की फसल तैयार करने की छूट दी जा रही है. भारत ने अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र महासभा और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को पक्के सबूत दिए कि वहां आतंकवादियों के प्रशिक्षण शिविर लगाए जा रहे हैं. भारत पाकिस्तानी साजिश का पहला शिकार रहा है. 1971 की शिकस्त को वहां के हुक्मरान न भूले हैं, न भूल पाएँगे. वे समझते हैं कि आमने-सामने के युद्ध में भारत से वे कभी नहीं जीत पाएँगे. इसलिए आतंकवादी तैयार करो. सीमा पार कराओ. जितनी तबाही उनके जरिये कराई जा सकती है, कराएं. यह भारत के खिलाफ पाकिस्तान का छदम युद्ध है. 11 सितम्बर 2001 को जब वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर अटैक हुआ और इन्वेस्टिगेशन में अमेरिका को पता चला कि उसके पीछे ओसामा बिन लादेन के गुर्गों का हाथ है तो उसे इस भीषण त्रासदी के भयानक अंजाम का अहसास पहली बार हुआ. विमानों को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराने वाले आतंकियों में से कुछ पाकिस्तान मूल के थे.
अब अमेरिका की समझ में आ चुका है कि पाकिस्तान पूरे विश्व की बर्बादी का कारण बन चुका है. वहां पनाह पाते रहे आतंकवादी किसी भी दिन परमाणु बम हासिल कर तबाही मचा सकते हैं. अब अमेरिका पाकिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की बात कर रहा है. वह भी तब जबकि पानी सर से ऊपर बहते हुए एक अरसा हो चुका है. पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरदारी को बेनजीर भुट्टो को खो देने के बाद भी आतंवादियों की ताकत का वास्तविक अंदाजा नहीं हुआ है. मेरियट होटल का धमाका बहुत बड़े संदेश देकर गया है. पाकिस्तान को इस एक धमाके का कितना बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा, इसका अंदाजा अभी वहां के हुक्मरानों को नहीं है. तबाही मचाने वाली मानवता विरोधी आतंकवादियों की ये जमात विश्व की तबाही का सबब बन सकती है. अब पाकिस्तान की समझ में आ जाना चाहिए कि दूसरों के लिए उसने जो साँप पाले थे, वे अब उसे ही डसने पर आमादा हैं. अगर समय रहते इसका फन नहीं कुचला गया तो आज मेरिअट होटल जला है, आने वाले समय में पूरा पाकिस्तान जलता हुआ नजर आएगा.

ओमकार चौधरी
omkarchaudhary@gmail.com

6 comments:

Deepak Bhanre September 22, 2008 at 3:53 PM  

वैसे बात पाकिस्तान को ही क्यों , अमेरिका को भी समझ आनी चाहिए , क्योंकि अमेरिका ने भी ताओ ऐसा ही काम किया है .

MANVINDER BHIMBER September 22, 2008 at 8:22 PM  

ओमकार जी आपने सही फ़रमाया है ....पाकिस्तान ने जो बोया है ....वही वो काट रहा है.....बात जब अपनों की आती है तो उसके मायने कुछ और निकाले जाते हैं....बबूल में तो कांटें ही होंगे...अच्छे लेख के लिए बधाई स्वीकारें

Udan Tashtari September 22, 2008 at 9:43 PM  

जो बोया है,वही वो काट रहा है.अच्छा आलेख!!आभार!!!

रंजन राजन September 22, 2008 at 11:46 PM  

अजीब संयोग है। शाम 7.32 बजे गुस्ताखी माफ पर -बोया बीज बबूल का आम कहां से पाओगे- शीर्षक से पोस्ट डाला। देर रात जब आपके ब्लाग पर पहुंचा तो वहां भी इसी िवषय पर वैचािरक िवश्लेषण। अच्छा लगा। अगर समय रहते इसका फन नहीं कुचला गया तो आज मेरिअट होटल जला है, आने वाले समय में पूरा पाकिस्तान जलता हुआ नजर आएगा.

Anonymous,  September 23, 2008 at 12:46 PM  

भाईजान,
नए रंग-रूप में। गजब। भैय़्या बस हमारी भाभी का खयाल रखना।

Hari Joshi September 23, 2008 at 12:56 PM  

आतंवाद के बीज अब विराट वृक्ष बन चुके हैं। सब जानते हैं कि आतंकवाद को पालने पोसने में किसका हाथ है। अमेरिका ने लादेन और तालिबानियों की कितनी मदद की सब जानते हैं लेकिन भस्‍मासुर तो वरदान देने वाले को भी तहस-नहस करने की कोशिश करता है। अभी भी वक्‍त है लेकिन आतंकवाद के माली अभी भी गंभीर नहीं हैं।

जो लिखा

पहले पेट पूजा.. फिर काम दूजा


फोटो : दीप चन्द्र तिवारी

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