Sunday, November 2, 2008

कुंबले, सौरव के बाद दबाव द्रविड़ पर



सौरव गांगुली के बाद जम्बो के अचानक सन्यास की घोषणा ने सबको हैरत में डाल दिया है. अनिल कुंबले भारत ही नहीं, दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों में से एक हैं. उनसे अधिक विकेट केवल मुथैया मुरलीधरन और शेर्न वारने ने लिए हैं. भारत में किसी गेंदबाज ने टेस्ट क्रिकेट में 619 विकेट लेने का कारनामा नहीं दिखाया. कपिल देव ने भी नहीं. कुंबले अठारह साल तक भारत के लिए खेले और अपने दम पर उन्होंने अनेक मैचों में शानदार जीत दिलाई. दुनिया के वे ऐसे दूसरे गेंदबाज हैं, जिन्हें एक ही पारी में सभी दस विकेट मिले. 1999 में कुंबले ने यह करिश्मा दिल्ली के इसी फिरोजशाह कोटला मैदान में पाकिस्तान के खिलाफ खेलते हुए किया था. जिस पर उन्होंने अन्तर राष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास लेने की घोषणा की.

जितना सम्मान कुंबले को मिलना चाहिए था, नहीं मिला. उन्हें कप्तानी भी तब मिली, जब करियर का संध्या काल आ पहुँचा था. निश्चित तौर इसे लेकर बहस होगी कि कुंबले ने अचानक सन्यास का ऐलान क्यों किया और क्या उन्हें भी सौरव गांगुली की तरह ही ससम्मान (?) क्रिकेट को अलविदा कह देने को मजबूर तो नही किया गया था. हालाँकि इस महान लेग स्पिनर ने रहस्योद्घाटन किया कि नागपुर टेस्ट के बाद वे सन्यास लेने का ऐलान करने वाले थे लेकिन उंगली की चोट के कारण एक टेस्ट पहले ही वे क्रिकेट को अलविदा कह रहे हैं.

कह सकते हैं कि भारत की लंबे समय तक सेवा करने वाला एक और जांबाज खिलाडी अब मैदान पर खेलते हुए नजर नहीं आएगा. कुंबले की विदाई और सम्मानजनक तरीके से हो सकती थी. ये ऐसे खिलाडी हैं, जो फ़िर कभी भारतीय टीम को नसीब नहीं होंगे. यह टेस्ट सीरीज कई घटनाओं के लिए याद की जाएगी. सचिन तेंदुलकर ने टेस्ट में सर्वाधिक रन बनने का ब्रायन लारा का रिकोर्ड तोड़कर भारत को फ़िर से यह गौरव दिलाया तो सौरव गांगुली ने अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया. सीरीज अभी ख़तम भी नहीं हुई है कि कुम्बले ने भी सन्यास का ऐलान कर दिया. जाहिर है, अब दबाव राहुल द्रविड़ पर आ गया है क्योंकि एक अरसे से उनका बल्ला खामोश है. यहाँ तक कि वे अपने घरेलू मैदान पर भी रनों के लिए तरसते हुए देखे गए. नागपुर में भी अगर यही हाल रहा तो द्रविड़ पर भी सौरव और कुंबले का अनुसरण करने का दबाव बढ़ जाएगा.

पिछले कुछ समय से टीम इंडिया के फाइव फेब खासी चर्चा में हैं. सचिन, सौरव, द्रविड़, लक्ष्मण और कुंबले पर अच्छा प्रदर्शन करने का जबरदस्त दबाव रहा है. सचिन और लक्ष्मण के अलावा केवल सौरव ही सैकडा लगाकर आलोचकों का मुह बंद करने में सफल रहे. सौरव चूकि पहले ही सन्यास का ऐलान कर चुके हैं, इसलिए उनके टीम में लौटने का प्रशन नहीं उठता. सचिन अभी सन्यास के बारे में दूर दूर तक भी नहीं सोच रहे हैं. लक्ष्मण ने भी दिल्ली टेस्ट में दोहरा शतक जमाकर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर दी है, इसलिए सारा दबाव अब द्रविड़ पर है. नागपुर में भी अगर वह नहीं चले तो उन पर भी गांगुली और कुंबले का अनुसरण करने का दबाव पड़ेगा.

ओमकार चौधरी
omkarchaudhary@gmail.com

5 comments:

हरि November 3, 2008 at 8:43 AM  

ओमकार जी खेल में यही होता है। चमत्‍कार को नमस्‍कार। आते का स्‍वागत और जाते को सलाम हो जाए तो यही उपलब्धि है।

parul November 3, 2008 at 10:09 AM  

khel ke mamle mein ghan chitan ke liye bdhai, samman ajj un logo ka rha hi nahi jinka hona chaiye, kuch hi log yha samj pate h, duniya bahut fast ho gai h

Danish Khan November 3, 2008 at 6:36 PM  

sir, badiya logo ka samman bahut kam hote dekha hai. unki hamesha kaat hoti kyoki woh hamesh jitte hai. lekin sir yeh india ko bada jhatka hai.
meerut me bhi ranji macth chal rah hai. thank you

MANVINDER BHIMBER November 3, 2008 at 8:38 PM  

. खेल के मैदान में जब खेल में खेल होता है तो जांबाज खिलाड़ी ऐसा ही करते हैं.....आपका आंकलन सही है.....इसमे कोई दो राय भी नहीं है......आपको बेहतरीन पोस्ट के लिए बधाई .......
और हाँ.....आपने मेरी बहुत छोटी सी नज्म की बहुत बड़ी तारीफ की है ......सच तो ये है की ईश्वर पता नहीं किस रूप में क्या कहता है.......बस ......मैं कविता और नज्म के बहाने उसे समझने का प्रयास भर करती हूँ और कुछ नहीं.......मेरा होसला बडाने के लिए शुक्रिया

suryakant Dwivedi November 3, 2008 at 11:48 PM  

ओमकार जी
बुढ़ापे में या आने वाले कल में सभी को संन्यास लेना है। कुंबले और सौरव प्रतिभाशाली हैं और राजनीति में दोनों को असमय विदा होना प़ड़ रहा है। जो इस्तीफा मांग रहे थे, वे स्वयं 35 साल की उम्र तक खेले। मानक दो। वेंगसरकर कौन से सूरमा रहे हैं। वेंगी से अच्छी परफोर्मेंस तो बेशक सौरव और कुंबले ने दी है. इस पर भी कभी कलम चलाइये। हमको इंतजार रहेगा. बधाई। हरि भाई कविता कहने लगे हैं। टिप्पणी दे दें.

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फोटो : दीप चन्द्र तिवारी

तकनीकी सहयोग- शैलेश भारतवासी

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