Tuesday, November 18, 2008

बिग बॉस के घर की रासलीला

आम तौर पर मै टेलीविजन पर सीरियल आदि नहीं देखता. कुछ सीरियल अच्छी कहानियो के साथ शुरू होते हैं लेकिन धीरे-धीरे इतने उबाऊ हो जाते हैं कि सिवाय बाल नोचने के दर्शक कुछ नहीं कर पाता. मजबूर होकर वह चेनल बदलता है लेकिन वहां भी वही हाल मिलता है. टीआरपी और कमाई का रोग ऐसा लग गया है कि न मूल्यों की परवाह है, न सिधान्तों की, न सामाजिक दायित्वों की और न आने वाली पीढी के भविष्य की. समाज में ऐसा भी होता है, इस

कुतर्क के आधार पर समाज में हो रहे तमाम तरह के अप्कर्मों को परोसा जा रहा है. कुछ रियल्टी शो चल रहे हैं. ये भी गजब हैं. कुछ विशुद्ध मनोरंजन कर रहे हैं, उनसे आम दर्शकों को खास शिकायत नहीं है, लेकिन बिग बॉस के हाउस जैसे कार्यक्रम किसका भला कर रहे हैं ? इस कार्यक्रम की टीआरपी बढ़वाने वाले लोगों में ख़ुद मै भी शामिल हूँ. मै इसे नियमित रूप से देख रहा हूँ. क्यों देखता हूँ, ख़ुद नहीं समझ पा रहा. शायद इसलिए कि इसमे प्रमोद महाजन के साहबजादे राहुल महाजन हैं, टीवी सीरियल्स की नामचीन अभिनेत्री श्वेता तिवारी के पूर्व पतिदेव राजा चौधरी हैं. कुछ दिन पहले तक अबू
सलेम की प्रेमिका मोनिका बेदी थी. शायद यह देखने के लिए कि इतनी बदनाम शख्सियतें एक जगह हैं तो किस तरह का व्यव्हार कर रहीं हैं. वे अपनी अपनी इमेज सुधरने के लिए क्या क्या कर रहे हैं. कितने शरीफ बनकर जनता की सहानुभूति लूटने की कोशिश कर रहे हैं. और

जनता भी किस तरह उन्हें बिग बॉस के हाउस में बनाए रखने के लिए एस एम् एस के जरिये समर्थन कर रही है. मेरी तरह बहुतों की दिलचस्पी शायद इन्हीं बातों को जानने में होगी.
और विडम्बना देखिये. विश्व सुन्दरी का खिताब जीतने वाली डायना हेडन को दर्शक बिरादरी ने मोनिका बेदी से भी पहले बिग
राहुल महाजन कितने अच्छे आचरण के हैं, इसी से पाता चल जाता है कि उनकी नव विवाहिता ने उन पर मार पीट का आरोप लगते हुए कुछ ही महीने में तलाक़ ले लिया. प्रमोद महाजन की तेरहवीं भी नहीं हुई थी, तब राहुल महाजन ड्रग लेने के चक्कर में गिरफ्तार हुए और मौत के मुह से लौटे. मोनिका के बारे में सारी दुनिया जानती है कि वह लंबे समय तक
माफिया डॉन अबू सलेम के साथ पुर्तगाल में रहकर ऐश करती रही. अब सलेम जेल की चक्की पीस रहे हैं तो ये बिग बॉस के

घर में राहुल महाजन के साथ मटक मटक कर रिश्ते बढ़ा रही हैं. दर्शक भी किसी फ़िल्म की रोमांटिक कहानी की तरह इसका पूरा लुत्फ़ लेते रहे. राजा चौधरी पर भी राहुल महाजन की तरह अपनी अभिनेत्री पत्नी पर मारपीट का आरोप लगा था. मामला पुलिस थाने तक पहुँचा. तलाक़ तक नौबत पहुँच गयी. इन तीन पात्रों के आलावा सम्भावना सेठ को पूरी दर्शक बिरादरी ने देखा कि किस तरह का आचरण उन्होंने बिग बॉस के हाउस में दिखाया. एक बार आउट होने के बाद लौटी तो पहले से भी
ज्यादा हंगामा किया. राजा चौधरी के साथ गाली गलौज तक हुई. क्या क्या नहीं दिखाया गया रियल्टी शो के नाम पर. लव स्टोरी दिखायी गयी. मारपीट दिखायी गयी. डांस, गीत संगीत से लेकर एक दूसरे के खिलाफ षडयंत्र दिखाए गए. यानी सब कुछ है इसमे. वह भी उन पात्रों के साथ, जिनकी समाज में कोई बहुत अनुकरणीय छवि नहीं है.

बॉस के घर से बेघर कर दिया. केतकी, एहसान कुरैशी, पायल रोहतगी, देबोजीत सहा जैसे तो महत्वहीन होकर रह गए.
इस रियल्टी शो के आयोजकों ने भी साबित किया कि महिलाओं का कब तक और किस तरह उपयोग किया जाता है. बिग बॉस के घर में भी उनसे रोटी बनवाई गयी, कपड़े धुलवाए गए. अपमानित भी कराया गया. सम्भावना सेठ हालाँकि ख़ुद भी कोई कसर करके नहीं लौटी वहां से लेकिन उन्होंने राजा चौधरी पर मानहानि का केस ठोकने का ऐलान कर दिया है. मोनिका

बेदी राहुल महाजन के बाहर आने का बेसब्री से इन्तजार कर रही है. उन्हें लगता है कि बिग बॉस के घर में राहुल से उनका जो प्रेम परवान चढा है, वह आगे बढेगा.
मेरी समझ में नहीं आ रहा कि बिग बॉस के इस घर में ऐसा कौन सा उत्तम कार्य हुआ है, जिससे प्रेरणा ली जाए.
लोगों को अच्छा लगता यदि बिग बॉस के घर में कुछ अच्छे आचरण के लोगों को आमंत्रित कर वहां रहने का अवसर दिया जाता. पता नहीं यह धरना क्यों बंटी जा रही है कि लोग बुरे लोगों को ही देखना चाहते हैं.

13 comments:

सागर नाहर November 18, 2008 at 11:35 AM  

बहुत सही कहा आपने, पर जनता भी यही सब देखना पसन्द करती है।
शायद आप और मैं भी!!

॥दस्तक॥
गीतों की महफिल
तकनीकी दस्तक

Suresh Chiplunkar November 18, 2008 at 12:09 PM  

मैंने आज तक नहीं देखा, चाहे जिसकी कसम उठवा लो… न ही शिल्पा शेट्टी वाला देखा था… जब वह नकली आँसू रोई थी तब समाचारों में जरुर देखा था, मूर्खों, शातिरों और बदमाशों को टीवी पर झेलना मेरे बस की बात नहीं, इसीलिये न्यूज भी सिर्फ़ हेडलाईन देखता हूं…

हरि जोशी November 18, 2008 at 8:03 PM  

कई दोस्‍त बिग बॉस का जिक्र करते हैं लेकिन इन सु?पात्रों के सहारे दर्शक जुट रहे हैं। बाजार के विस्‍तार को खाद-पानी मिल रहा है। आप भले ही कोसें लेकिन आप भी दर्शकों की संख्‍या का हिस्‍सा तो बन ही रहे हैं।

नीरज गोस्वामी November 19, 2008 at 12:14 AM  

पसंद अपनी अपनी ख्याल अपना अपना...दर्शक जो देखना चाहते हैं चेनल वाले वो ही दिखाते हैं तभी तो बिग बोस जैसे सीरियल की टी आर पी ऊपर जा रही है...राहुल को देख कर दुःख होता है...कैसे बाप का कैसा बेटा..उफ़
नीरज

अशोक मधुप November 19, 2008 at 9:21 AM  

हरेक चरित्र व्यक्तित्व का अपना वजूद है। बिग बास के पात्रों को देने एवं बनाने वाला हमारा सामज ही है। हाल मे एक लड़की ने मेरठ में अपनी सहेली के साथ मिलकर माता पिता को मारने की घटना पढीं । क्या लडकियों के बारे मे पढने से एेसा नही लगता कि उनके साथ उनके परिवार, समाज ने बडी़ ज्यादति की है। उसी का परिणाम यह आता कि वह पैदा करने वाले मां वाप की हत्या करने में लग गई
अशोक मधुप

अल्पना वर्मा November 19, 2008 at 10:01 AM  

Achcha hai ki is channel ka prasaran yahan nahin hota..phir bhi samacharon mein is ke baare mein khabar milti rahti hain--aur maluum chalta hai ki kis tarah se Moral values gir rahi hain aur is tarah ke shows ko badhava mil raha hai--behad ghatiya show ban gaya hai yah.
TRP ke liye aaj kal channels kaise bhi shows bana saktey hain--dusra example hai--'laughter 'comedi circus etc- shows ,jin mein behad ghatiya -double meaning ke jokes -family shows ke naam par dikhatey hain--
kya koi standard nahin hai??

MANVINDER BHIMBER November 19, 2008 at 9:17 PM  

आपके ब्लॉग पर देर से आने के लिए मुआफी चाहूंगी.......
अपने भी बिग बॉस देखा ये .......हेराँ हूँ.......लेकिन अच्छा ही किया ......ये लोग जो भी कर रहे हैं ...वो सब दर्शकों को बेवकूफ बनने के लिए कर रहें है......सस्ती लोक प्रियता हासिल करने का सस्ता हथकंडा .....मेने बिग बॉस को केवल ख़बरों में ही देखा है ......अच्छी पोस्ट लिखी है, बधाई

sonia November 24, 2008 at 5:08 PM  

mujhe bhi yeh baat aaj tak samajh nahi aayee ki aakhir kyun log aise hi logo dekhna pasand kartehai. phir lagta hai ki woh jante hai ki kaun kitna bura hai or ya phir aise reality show ke jariye janne ki koshish karte hai ki kya log waqai me aise hai jaisa ki media wale show karte hai ya phir baat kuch or hai. kyunki agar dekha jaye to inhone aise hi lago ko liya hai jinhe jyada T.V na dekhne wale log bhi jante ho, jisse ki logo mein yeh show hdekhne ka intrest bane or T.V walo ki kamai ho. Per aap bahut sahi keh rahe hai ki isse samaj per kya asar padega isse serial banane walo ko koi farq nahi padta. Ekta kapoor ke serials ne to hadd hi ker di hai. samajh nahi aata ki sensor board aise serial banane ki ijajat kaise de deta hai????????????

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