Sunday, September 20, 2009

थरूर जैसों को मंत्री होना चाहिए ?


शशि थरूर का नाम तो आप जानते होंगे? वही, थरूर जो सयुंक्त राष्ट्र महासभा में 2006 तक उप सचिव के पद पर रहे और कोफी अन्नान रिटायर हो रहे थे तो नए महासचिव पद के लिए हुए चुनाव में जिन्हें भारत ने अपनी ओर से उम्मीदवार बनाया। जो बान की मून से हार गए। अब भी नहीं समङों हों तो बता दें कि आजकल ये महाशय भारत सरकार में विदेश राज्य मंत्री हैं। यूएन से भारत लौटे तो कांग्रेस ने उन्हें केरल से लोकसभा का टिकट थमा दिया। वे जीतकर आए तो जैसे मंत्री पद उनकी राह देख रहा था। आमतौर पर पहली बार के सांसद को मंत्री पद नहीं मिलता लेकिन चूकि उनका प्रोफाइल बड़ा ही समृद्ध था, इसलिए मनमोहन सरकार में शपथ लेने के लिए उन्हें पापड़ भी नहीं बेलने पड़े।
उन्हीं लेखक, राजनयिक, राजनीतिक और मंत्री महोदय ने ट्वीटर पर एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा कि विमान के इकोनोमी क्लास में यात्रा करने वाले लोग मवेशी यानि जानवर की तरह होते हैं। शायद उन्हें इसका इल्म नहीं था कि उनकी यह अभद्र टिप्पणी उनके आगे के करियर पर विराम भी लगा सकती है। जब उन्होंने टिप्पणी की, उसके दो दिन पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी मुंबई गई तो विमान की इकोनोमी क्लास में बैठकर और लौटी भी उसी क्लास में। राहुल गांधी ने भी नई दिल्ली से लुधियाना तक की यात्रा स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस से की। यानि सोनिया और राहुल ने मवेशियों की तरह विमान और ट्रेन में सफर किया।
शशि थरूर के इस दंभपूर्ण वाहियात बयान से देश भर से तीखी प्रतिक्रिया आई हैं। खुद कांग्रेस के कई नेता उबल पड़े हैं। उन्हें लगता है कि थरूर ने सोनिया और राहुल गांधी का अपमान किया है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने थरूर से इस्तीफे की मांग की है तो पार्टी प्रवक्ता जयंती नटराजन ने इस टिप्पणी को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। मनीश तिवारी ने कहा है कि पार्टी उचित समय पर थरूर के खिलाफ कार्रवाई करेगी। दिल्ली के दो आलीशान पांच सितारा होटलों में तीन महीने तक रहने का रिकार्ड जिन दो मंत्रियों ने कायम कर करोडो़ रुपया खर्च किया है, उनमें शशि थरूर भी हैं। वे और विदेश मंत्री एसएम कृष्णा फाइव स्टार होटलों में डेरा जमाए हुए थे। यह मामला मीडिया में तब उछला जब वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने प्रेस के सामने इन दोनों को सलाह दी कि वे या तो अपने आवासों में जाएं या फिर हैदराबाद हाउस के अतिथि गृह में चले जाएं। इन्हें होटलों से जाना पड़ा। प्रणब दा ने मंत्रियों को यह सलाह भी दी थी कि मंदी के दौर को देखते हुए मंत्री पांच सितारा होटलों में कार्यक्रम वगैरा न रखें और बिजनेस क्लास के बजाय विमान की इकोनोमी क्लास में यात्रा करें। कई मंत्रियों ने उस समय इस पर नाक-भौं भी सिकोड़ी।
इस तथ्य का खुलासा बाद में हुआ कि प्रणब मुखर्जी ने दरअसल, प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की हिदायतों के बाद ही मीडिया के सामने इन मंत्रियों को सलाह दी थी ताकि इनके साथ-साथ दूसरे शाहखर्च मंत्रियों को भी संदेश चला जाए। प्रणब मुखर्जी एेसे मंत्रियों को सलाह देने तक सीमति नहीं रहे। पिछले सप्ताह वे कोलकाता गए तो सामान्य व्यवसायिक विमान की इकोनोमी क्लास में बैठकर। मनमोहन सिंह, सोनिया और राहुल को इसकी भनक लग गई थी कि कुछ मंत्रियों ने खर्चो में कटौती करने की उनकी मुहिम का विरोध किया है। संभवत: एेसे लोगों को नसीहत देने के लिए ही सोनिया ने मुंबई तक का सफर यात्री विमान की इकोनोमी क्लास में किया, जबकि सुरक्षा कारणों से एसपीजी, आईबी और दूसरी एजेंसियां उन्हें सलाह देती रही हैं कि वे विशेष विमान से ही यात्रा करें ताकि खतरे को कम किया जा सके।
थरूर की कौन सी ग्रन्थी ने उन्हें इतनी अभद्र टिप्पणी के लिए प्रेरित किया, यह तो वही जानें, लेकिन इससे उठे बवाल ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोनिया और राहुल उनकी हिमाकत से नाराज हैं। इसकी जानकारी मिलते ही न केवल उन्होंने बयान पर माफी मांगी बल्कि माफी मांगने के लिए शुक्रवार को सोनिया गांधी के आवास भी पहुंच गए। जाहिर है, उनकी कोशिश मंत्री पद बचाने की है। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि शशि थरूर को माफ नहीं किया जाएगा और देर-सबेर उन्हें मंत्री पद से जाना होगा।
यहां सवाल यह उठता है कि लंदन में जन्मे, पढ़े-लिखे और 28 साल तक संयुक्त राष्ट्र महासभा यानि विदेश में ही नौकरी करने वाले शशि थरूर को भारत और यहां के नागरिकों, उनकी समस्याओं, माली हालत और जमीनी वास्तविकताओं की कितनी समझ है? अगर यह सब भी नहीं हो तो कम से कम उन्हें इसका ज्ञान तो होना ही चाहिए कि इस देश की एक सौ बीस करोड़ में से सौ करोड़ जनता तो विमानों में भी यात्रा नहीं करती है। वह तो ट्रेन, बसों, तांगों, ट्रकों वगैरा में ही सफर करती है। सवाल है कि जिस व्यक्ति को भारत जैसे गरीब देश की दशा और दिशा की जानकारी तक नहीं है, उसे मंत्री किसने बनाया है? उसी कांग्रेस ने न जो अपना हाथ आम आदमी के साथ बताकर वोट लेती रही है? तो दोषी कौन है?

7 comments:

Satyajeetprakash September 20, 2009 at 6:35 PM  

अन्ना, काहे को कोस रहे हैं थरूर को. थरूर ने सच्चाई कही है जो देश का हर नेता जनता को समझते हैं. क्या उनके मवेशी क्लास में दो-चार रोज रूकने से उनकी ऐय्याशी कम हो जाती है. कभी नहीं.

अजय कुमार झा September 20, 2009 at 7:14 PM  

हमें तो लगता है कि कुछ नहीं थरूर की टाइमिंग खाली गलत हो गयी थी..सो भुगत रहे हैं...वास्तव में तो कैटल क्लास..हवाई जहाज़ को असलियत में देख भी नहीं पाता है..बैठना तो दूर रहा....

नारायण प्रसाद September 20, 2009 at 8:18 PM  

सवाल तरूर जैसों को मंत्री होना चाहिए ? के बदले सवाल यह होना चाहिए - तरूर जैसों को मंत्री बनाना चाहिए ?
उत्तर है - बिलकुल नहीं ।

फ़िरदौस ख़ान September 21, 2009 at 11:26 AM  

सही सवाल किया अपने...

ASHA RANI September 26, 2009 at 1:10 PM  

agar mamla havai jahaj me udne valon ka hi hai to... shesh janta ko unke kathan pe kya narajgi hogi...

प्रवीण जाखड़ October 21, 2009 at 10:25 PM  
This comment has been removed by the author.
प्रवीण जाखड़ October 21, 2009 at 10:27 PM  

चौधरी साहब
प्रतिनिधित्व उसे ही मिलना चाहिए, जो जन-मानस की समझ रखता हो। शशि थरूर ने जिस संस्कृति को देखा है, जिया है वह भारतीय संस्कृति से बहुत अलग है। यहां का स्वभाव और संस्कार अलग है। जिस आदमी को अपनी जनता का दर्द महसूस नहीं होता, मुझे लगता है ऐसे को चुनना ही अपने आप में त्रासदी भरा है।
आप पहली बार आपके ब्लॉग पर आने का मौका लगा है। आपके ब्लॉग का लेआउट और प्रजेंटेशन जितना प्रभावी है आपका लेखन कायल करने वाला है। अच्छे लेखक से आज की मुलाकात संतुष्टि भरी है। शुक्रिया और ढेर सारी शुभकामनाएं।

तकनीकी सहयोग- शैलेश भारतवासी

ऊपर वापिस लौटें