Sunday, December 13, 2009

क्यों जरूरी हैं नए, छोटे राज्य


तेलंगाना राज्य की मांग मानकर लगता है, केन्द्र ने बर्र के छत्ते में हाथ में डाल दिया है। आंध्र प्रदेश की राजनीति में तो भूचाल आ ही गया है, हरित प्रदेश, बुंदेलखंड, पूर्वाचल, महाकौशल, विंध्याचल, ग्रेटर कूचविहार, गोरखालैंड, कोच राजभोगसी मातृभूमि, बोड़ोलैंड, सौराष्ट्र, विदर्भ, रायलसीमा, त्रवणकौर, कुर्ग, तुल्लुनाडु, लद्दाख और पानून सहित देश के विभिन्न हिस्सों में अट्ठारह नये राज्यों की मांग के समर्थन में चलते रहे आंदोलनों के फिर से जोर पकड़ने की आशंका उत्पन्न हो गयी है। गोरखालैंड के लिए जहां अनशन शुरू हो गया है, वहीं अजित सिंह ने शीतकालीन सत्र के बाद हरित प्रदेश के लिए व्यापक आंदोलन छेड़ने का एेलान कर दिया है। आंध्र प्रदेश में टीडीपी और प्रजा राज्यम पार्टी तो तेलंगाना के विरोध में सड़कों पर आ ही गयी हैं, कांग्रेस के भीतर से भी विरोध के स्वर तेज हो गये हैं। के चंद्रशेखर राव के आमरण अनशन से घबरायी केन्द्र सरकार ने अलग तेलंगाना गठित करने की प्रक्रिया शुरू करने का एेलान तो कर दिया है, लेकिन लगता है कि वह बुरी तरह फंस गयी है। हालात इतने विषम हो चले हैं कि उसकी आंध्र प्रदेश की सरकार शहीद भी हो सकती है। दिवंगत राजशेखर रेड्डी के पुत्र जगन मोहन रेड्डी के रोसैया को मुख्यमंत्री के रूप में पचा नहीं पा रहे हैं. पहले विधायकों के इस्तीफों का नाटक हुआ और अब बीस मंत्रियों ने भी अपने त्यागपत्र सौंप दिए हैं. कांग्रेस हाई कमान को सीधा सन्देश है कि आन्ध्र में वाही होगा जो राजशेखर रेड्डी का परिवार चाहेगा. संकट गहरा है. यही वजह है कि शनिवार को प्रणब मुखर्जी ने जगन मोहन रेड्डी से बात की और पार्टी नात्रत्व की नाराजगी से उन्हें अवगत करा दिया.
नये राज्यों के गठन की मांग को लेकर आंदोलन चलाने वालों के जो तर्क हैं, उन्हें आप खारिज नहीं कर सकते। भारत की आबादी 115 करोड़ से ऊपर पहुंच रही है। प्रदेश हैं कुल पैंतीस। इनमें 28 राज्य हैं और सात केन्द्र शासित प्रदेश। इनमें कई राज्य तो क्षेत्रफल और जनसंख्या के मामले में दुनिया के साठ देशों से भी बड़े हैं। उत्तर प्रदेश की जनसंख्या सोलह करोड़ को पार कर चुकी है। राजस्थान की आबादी करीब 6 करोड़ है। बिहार और पश्चिम बंगाल की आठ करोड़ से अधिक। तमिलनाड़ु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात छह करोड़ से अधिक की आबादी वाले राज्य हैं। इसके विपरीत पुंडुचेरी, लक्ष्यदीप, दमन और दीव, दादरा नगर हवेली, चंडीगढ़, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, उत्तराखंड, त्रिपुरा, सिक्किम, मिजोरम, मणिपुर और गोवा दस से अधिक राज्य एेसे हैं, जिनकी जनसंख्या एक करोड़ भी नहीं है। बड़े राज्यों में कई तरह की समस्याएं हैं। बेरोजगारी, कानून व्यवस्था और न्याय व्यवस्था ही नहीं, शासन-प्रशासन के स्तर पर भी फैसले लेने और हर क्षेत्र के संतुलित विकास में साफ-साफ झोल दिखायी देते हैं।
अमेरिका की जनसंख्या दुनिया की कुल जनसंख्या का केवल पांच प्रतिशत है, लेकिन वहां साठ के करीब राज्य हैं। भारत की जनसंख्या दुनिया की कुल जनसंख्या की सत्रह प्रतिशत है, लेकिन यहां केवल पैंतीस राज्य हैं। दर्जनों राज्यों में जनसंख्या का घनत्व कहीं ज्यादा है। वहां कई तरह की समस्याएं खड़ी होनी शुरू हो चुकी हैं। एक-दो राज्यों को अपवाद स्वरूप छोड़ दें तो अधिकांशत: यह देखने में आया है कि छोटे राज्यों के विकास तेज गति से होते हैं। मौजूदा राज्यों में हरियाणा को आदर्श राज्य के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि भौगोलिक रूप से इसे दिल्ली के पास होने और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा करीब होने का सीधा लाभ भी मिला है, लेकिन नक्चसल प्रभावित राज्यों को छोड़ दें तो बाकी छोटे राज्यों में आमतौर पर असंतुलित विकास और समस्याओं की अनदेखी करने के आरोप सुनने में कम ही आते हैं।
यह सही है कि कई क्षेत्रों में राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति की मंशा से भी नये राज्यों के गठन की मांग को लेकर आंदोलन हुए हैं, लेकिन इसे दूसरे नजरिये से देखने की जरूरत है। बदले हुए हालातों में छोटे राज्यों के महत्व और जरूरत को बहुत देर तक टाला नहीं जा सकेगा। देश के विभिन्न भागों में करीब डेढ़ दर्जन नये राज्यों की मांग इस समय चल रही है। तेलंगाना की घोषणा के बाद आंध्र प्रदेश में इसके समर्थन और विरोध में जिस तरह के हालात उत्पन्न हो गये हैं, हो सकता है उस पर थोड़ा पानी डालने के मकसद से ही कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने नये राज्यों के लिये राज्य पुर्नगठन आयोग बनाने की जरूरत बतायी हो, लेकिन यह हकीकत है कि इसका गठन अविलंब होना चाहिए, जो देखे कि कहां-कहां नये राज्यों का गठन जरूरी है। देश के अट्ठारह क्षेत्रों में यदि सरकारें आंदोलनों का सामना करेंगी तो स्वाभाविक है, वहां तमाम तरह के विकास कार्य सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।
omkarchaudhary@gmail.com

2 comments:

ASHA RANI December 14, 2009 at 11:05 AM  

bilkul sahi kaha aapne. aam janta ki bhalai aur vikas ke liye bhi aisa karna jaruri hai.

ROOP CHAUDHARY,  December 18, 2009 at 3:35 PM  

aaj ki vastavik sitithi ka chitran kiya hai,ye faisle rajneeti ko chhodkar desh ke hit ko soch kar kiye jane chahiye.janta ka vikas kaise ho is per vichar karna hoga.apne bilkul sahi likha hai,badhai.....

तकनीकी सहयोग- शैलेश भारतवासी

ऊपर वापिस लौटें