Thursday, February 25, 2010

बेशकीमती कोहिनूर है सचिन


प्रधानमंत्री ने कहा, सचिन तेंदुलकर जैसा कोई नहीं है और उन पर देशवासियों को गर्व है। उसके कुछ ही देर बाद राष्ट्रपति का बधाई संदेश भी आ गया। जिस समय न्यूज चैनलों पर सचिन की महानता के गुणगान हो रहे थे, खुद तेंदुलकर उस समय दो सौ रनों की नाबाद मैराथन पारी खेलने के बावजूद मैदान पर उसी उत्साह के साथ फील्डिंग करते नजर आ रहे थे। छोटे कद के इस महान खिलाड़ी ने ग्वालियर में दक्षिण अफ्रीकी टीम के खिलाफ दूसरे वनडे में वह कारनामा कर दिखाया, जिसके सपने हर बड़ा खिलाड़ी देखता है। वनडे में दोहरा शतक लगाने का असाधारण करिश्मा। इसके आस-पास तक तो कई आए, लेकिन अंतत: इसे अंजाम दिया बीस साल से अनवरत क्रिकेट खेल रहे 36 वर्षीय सचिन रमेश तेंदुलकर ने। पाकिस्तान के अनवर सईद, विवियन रिचर्डस, सनथ जयसूर्या और खुद सचिन 186 से 194 तक रनों तक का पहाड़ चढ़ लिए थे, लेकिन पहाड़ को फतेह किया मास्टर ब्लास्टर ने।
देश कई तरह के संकटों से जूझ रहा है। आंतरिक सुरक्षा का सवाल बड़ा है। महंगाई से हर कोई कराह रहा है। इस मुद्दे पर संसद गर्म है। विपक्ष काम-काज रोककर इस पर बहस का दबाव बनाए हुए है। दोपहर में रेल मंत्री ममता बनर्जी ने राहत भरा बजट पेश कर देशवासियों की दुख तकलीफों को थोड़ा कम करने की कोशिश की थी। टीवी चैनलों पर उस समय रेल बजट पर टीका टिप्पणियों का दौर चल ही रहा था कि खबर आई कि सचिन ने ग्वालियर वन डे में 46 वां शतक पूरा कर लिया है। रिमोट पर चैनल बदले जाने लगे। लोगों की नजरें सचिन पर जा टिकीं। उस सचिन पर जिसने पिछले एक साल में कई नए कीर्तिमान स्थापित कर डाले हैं। पिछले एक साल में दस टैस्ट मैचों में उन्होंने छह शतक ठोक डाले हैं। जिनमें से चार तो लगातार चार मैचों के हैं। टैस्ट में 47 शतक और वनडे में 46 शतक वे अपने नाम कर चुके हैं। अब शतकों के शतक से वे मात्र सात शतक दूर हैं। जिस तरह उनका बल्ला बोल रहा है, लगता है अगले साल तक यह करिश्माई खिलाड़ी इस कारनामे को भी अंजाम दे चुका होगा।
पूरा देश उनके कीर्तिमानों पर आह्लादित है। वे कोई नया कारनामा करते हैं तो लोग अपनी दुख तकलीफों को भूल जाते हैं। एेसे ही जैसे कुछ ही पलों के लिए सही, लोग महंगाई को भूल गए। उन्हें लगता है, जैसे ये उपलब्धि सचिन की नहीं, उनकी अपनी है। सचिन हर परिवार के अपने हो गए हैं। सुनील गावस्कर को सचिन अपना प्रेरक मानते रहे हैं। वो गावस्कर कह रहे थे कि मेरा मन कर रहा है की मई सचिन के पांव छू लूँ। नाना पाटेकर कह रहे थे कि मैं मरूंगा तो अपनी आंखें दानकर जाऊंगा ताकि मरने के बाद भी सचिन को खेलते हुए देखता रहूं। गायक अभिजित की टिप्पणी थी कि सचिन व्यक्ति
नहीं, सच में भगवान हैं। खुद भगवान भी आकर बल्लेबाजी करते तो शायद इस तरह न खेल पाते। जितने मुंह, उतनी बातें। सच में इस खिलाड़ी ने भारतीयों का मस्तक पूरी दुनिया में ऊंचा किया है। सचिन भारतीय है, इस पर हर भारतीय ही नहीं, समूचे महाद्वीप को गर्व है। पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर रमीज राजा ने कहा कि जब मास्टर ब्लास्टर ने सईद अनवर का 194 रन का रिकार्ड तोड़ा तो पाकिस्तान में दुआ की जा रही थी कि वह दोहरा शतक जरूर बनाएं। और दुआ कुबूल हो गई।
दुआएं सरहद पार ही नहीं की जा रही थीं, स्टेडियम में बैठे उनके संगी-साथी, हजारों की भीड़, टेलीविजन चैनलों से चिपके करोड़ों लोग भी प्रार्थना कर रहे थे कि उनकी मुराद पूरी करा दे। सचिन जिस तरह खेल रहे थे, उसमें लग रहा था कि वह वन डे में दो सौ रन बनाने का कारनामा आज जरूर कर दिखाएंगे। और एेसा हुआ। जिस समय पूरी दुनिया सचिन को बधाई दे रही थी, पता नहीं अपनी क्षुद्र राजनीति के लिए इस जीनियस को भी निशाने पर लेने वाले वे लोग कहां दुबक गए थे, जिन्होंने पिछले दिनों उनके खिलाफ तुच्छ बयानबाजी कर अपनी जगहंसाई कराई थी। शाबास, सचिन लगे रहो। पूरे देश को आप पर गर्व है।
omkarchaudhary@gmail.com

8 comments:

Udan Tashtari February 25, 2010 at 3:16 AM  

जय हो सचिन की!

ASHA RANI February 25, 2010 at 7:38 AM  

yakinan khelon me sachin jaisa shayad koi nahi. hame garv hai ki vo bharat se hain. magar cricket ham par kuchh jyada hi havi ho gya hai. is desh ki janta ko itne samay khapau khel me itni dilchspi q hai. bachcho ke exam hain. cricket unhe vichlit to kar hi raha hai.

अमिताभ मीत February 25, 2010 at 7:56 AM  

The greatest cricketer of our times has done India proud .... time and again ...

We are all proud of you Sachin ... God of Cricket !!

काजल कुमार Kajal Kumar February 25, 2010 at 8:12 AM  

हम खुशकिस्मत हैं कि हमने सचिन को खेलते देखा है

dharmendra February 25, 2010 at 2:53 PM  

aisa lag rha hai ki sachin par aap aur likhte. yeh lekh chote dikhne lage hain.

arvind kumar February 25, 2010 at 7:15 PM  

omkar bhai
bahut sargarbhit lekh hai.badhai.
ARVIND KUMAR SINGH

हरि जोशी February 25, 2010 at 7:29 PM  

कोई व्‍यक्ति पैदाइशी महान नहीं होता बल्कि साधना और समपर्ण उसे महानता की श्रेणी में लाकर खड़े करते हैं। फिर सचिन से बेहतर प्रेरणाश्रोत और कौन हो सकता है।

तकनीकी सहयोग- शैलेश भारतवासी

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