Wednesday, March 3, 2010

शिवेंद्र पर यह अत्याचार क्यों ?


पाकिस्तान के खिलाफ पहला गोल दागकर भारतीय हाकी टीम को पूरी तरह लय में ले आने वाले स्टार फारवर्ड शिवेन्द्र सिंह पर दो मैचों का प्रतिबंध किसी के भी गले से नहीं उतर रहा है। मैच डायरेक्टर ने आरोप लगाया है कि उन्होंने जानबूझकर पाकिस्तानी खिलाड़ी फरीद अहमद को स्टिक से चोट पहुंचाई। यह बड़े ताज्जुब की बात है कि न पाकिस्तानी टीम ने इसकी शिकायत की और न फील्ड अम्पायरों ने। इसके बावजूद मैच डायरेक्टर केन रीड ने इस महत्वपूर्ण भारतीय खिलाड़ी पर पहले तीन मैचों का प्रतिबंध लगा दिया और अपील करने के बाद उसे घटाकर दो मैच कर दिया। नतीजतन शिवेन्द्र सिंह न तो मंगलवार को आस्ट्रेलिया के खिलाफ हुए प्रतिष्टापूर्ण मैच में खेल सके और न गुरुवार को स्पेन के खिलाफ खेल पाएंगे। इस नादिरशाही फैसले से एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि पश्चिमी देशों के खेल अधिकारी भारतीय महाद्वीपीय खिलाड़ियों के खिलाफ सजा सुनाने के बहाने ढूंढ़ते रहते हैं। वरना क्या जरूरत थी शिवेन्द्र सिंह के खिलाफ इतनी बड़ी सजा सुनाने की। विश्व कप के मैचों में यदि बेवजह इस तरह किसी विशेषज्ञ फारवर्ड खिलाड़ी को टीम से बाहर बैठने को विवश कर दिया जाता है तो उससे पूरी टीम के मनोबल पर बुरा असर पड़ता है। यही नहीं, उसके ओवर आल परफारमैंस पर भी प्रभाव पड़ता है। जैसी कि उम्मीद थी, पूर्व हाकी खिलाड़ियों, कप्तानों और हाकी विशेषज्ञों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। खुद शिवेन्द्र सिंह ने भी इस पर हैरत जताते हुए कहा कि उनकी स्टिक पाकिस्तानी खिलाड़ी को लग गई है, इसका उन्हें आभास तक नहीं था. उन्होंने बताया कि एक पाकिस्तानी खिलाडी ने जब उन्हें पैर से बाधा पहुंचाई तो वह गिरने लगे. इस से बचने के लिए उन्होंने संतुलन बनाने के लिए स्टिक वाला हाथ ऊपर को किया. संभवत : उसी दौरान स्टिक पाकिस्तानी खिलाडी को छू गई. उसे कोई चोट भी नहीं आई. न उन्होंने उसे चोट पहुँचाने कि मंशा से ऐसा किया. फिर भी यदि उन पर पाबन्दी थोपी जा रही है तो उन्हें इसका पूरी ज़िन्दगी अफ़सोस रहेगा. इसका आभास भी उन्हें तब हुआ, जब डीनर के समय कोच ने उन्हें बताया कि मैच डायरेक्टर ने सुबह उन्हें सुनवाई के लिए तलब किया है। दिलचस्प और आश्चर्यजनक बात यह है कि केन रीड ने शिवेन्द्र सिंह की सफाई को मानने से इंकार कर दिया। शिवेंद्र सिंह ने कहा कि जिस अपराध के लिए ग्रीनकार्ड की भी आशंका नहीं थी, उसके लिए इतनी बड़ी सजा सुना दी गई। इसका मलाल उन्हें ताउम्र रहेगा। कहा तो यह भी जा रहा है कि एफआईएच में भारत का प्रतिनिधित्व नहीं होने की वजह से उनके साथ यह नाइंसाफी हुई है। एक और दिलचस्प बात यह है कि दूसरे हाफ में भारतीय खिलाड़ी गुरविंदर सिंह चांडी को भी पाकिस्तानी खिलाड़ी ने चोट पहुंचाई थी, लेकिन उसे नोटिस नहीं किया गया। जफर इकबाल और मीररंजन नेगी जैसे पूर्व खिलाड़ियों ने भी कहा है कि यदि एफआईएच में भारत की नुमाइंदगी होती तो भारतीय क्रिकेट बोर्ड की तरह हाकी इंडिया भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक दमदार होता। शिवेंद्र को इसका मलाल है कि वह आस्ट्रेलिया के खिलाफ नहीं खेल सका। वह उसके खिलाफ खेलने की खास तैयारी कर रहा था। आस्ट्रेलियाई काफी तेज-तर्रार हाकी खेलते हैं जिससे फारवर्ड पंक्ति के लिए गोल करने के मौके बनते हैं। शिवेन्द्र को मैच में गोल करने का यकीन था। हाकी प्रशंसकों में तो इससे गहरी निराशा और नाराजगी है ही, हाटी टीम के कप्तान राजपाल सिंह और कोच होजे ब्राजा ने भी इतनी कड़ी सजा को गलत करार दिया. मंगलवार को आस्ट्रेलिया के हाथों भारतीय टीम पांच दो के बड़े अंतर से हार गई. यदि शिवेंद्र मैदान में होता तो शायद टीम की यह हालत नहीं होती.
omkarchaudhary@gmail.com

1 comments:

ASHA RANI March 3, 2010 at 8:09 AM  

bilkul sahi kah rahe hain aap.

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