Wednesday, March 3, 2010

ये जिद पड़ सकती है भारी


महंगाई पर विपक्ष संसद से सड़कों तक पर विरोध कर रहा है। आम आदमी महंगाई की मार से बुरी तरह कराह रहा है। उसे उम्मीद थी कि आम बजट में कुछ एेसे प्रावधान जरूर होंगे, जिनसे राहत मिल सके, लेकिन बजट आफत बनकर उनके ऊपर गिरा। वित्त मंत्री ने पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद और सीमा शुल्क बढ़ाकर जले पर नमक छिड़कने का काम कर डाला। आश्चर्य की बात तो यह है कि प्रणब मुखर्जी ही नहीं, प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह भी रोल बैक करने को तैयार नहीं हैं। संयुक्त अरब अमीरात की अपनी यात्रा के दौरान ही उन्होंने एेलान कर दिया कि पेट्रोलियम पदार्थो के मूल्यों में की गई बढोत्तरी को वापस नहीं लिया जाएगा। सोनिया गांधी ने कोर कमेटी की बैठक बुलाई, लोगों को लगा कि शायद वे सरकार को रोल बैक करने को कहेंगी, लेकिन कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ का नारा बुलंद कर दो-दो बार केन्द्र में सरकार गठित करने का जनादेश लेने वाली पार्टी की मुखिया ने भी प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री की हां में हां मिलाई। अब विपक्ष के विरोध की परवाह न करते हुए कांग्रेस ने खुला एेलान कर दिया है कि बढ़ाई गई कीमतें वापस नहीं ली जाएंगी। सरकार ने अपनी पार्टी को यह पहाड़ा पढ़ा दिया है कि इस वर्ष यदि आर्थिक विकास दर आठ प्रतिशत के पार ले जानी है और राजकोषीय घाटा कम करके पांच प्रतिशत के स्तर पर लाना है तो कड़े उपाय करने ही होंगे। कांग्रेस को लगता है कि यही एेसा साल है, जिसमें कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। अगले साल पश्चिम बंगाल से लेकर तमिलनाड़ु तक में विधानसभा चुनाव होने हैं, लिहाजा अगले साल तो बजट में रियायतों की घोषणा करनी ही पड़ेगी। यानी जब वोट लेना हो, तब मतदाताओं पर मेहरबानी दिखाइए और जब मतलब निकल जाए तो विकास दर का रोना रोकर उसे महंगाई के बोझ में दबा दीजिए। विपक्षी दल काफी आक्रामक मूड़ में हैं। 1975 में देश पर इमरजंसी थोपे जाने के वक्त समूचा विपक्ष कांग्रेस के खिलाफ इस तरह एकजुट हुआ था। आज आलम यह है कि भाजपा के साथ उसके सहयोगियों के अलावा वामपंथी पार्टियां, राजद, सपा, टीडीपी, और बसपा सहित लगभग सभी छोटे दल भी एकजुट होकर कांग्रेस नीत यूपीए सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। कांग्रेस के पास विपक्षी दलों के इस आरोप का कोई जवाब नहीं है कि जब-जब कांग्रेस सत्ता में आती है, महंगाई बढ़ जाती है। इस बार तो महंगाई ने सारे रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं। विपक्ष इसके लिए सरकारी नीतियों को जिम्मेदार बताते हुए कह रहे हैं कि एेसा आर्थिक कुप्रबंधन उसने कभी नहीं देखा। बुधवार को भी विपक्ष ने संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी। लोकसभा और राज्यसभा को पहले बारह बजे तक स्थगित किया गया। फिर दो बजे तक. विपक्ष के कड़े रुख के बाद कांग्रेस के सूत्र कुछ चुनींदा टीवी चैनलों के माध्यम से यह संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार पेट्रोल के दामों में तो कमी नहीं करेगी, लेकिन डीजल के दाम एक रुपया कम करने का एेलान कर सकती है। सरकार नहीं चाहती कि इसका श्रेय विपक्षी दलों को मिले। सरकार इसका श्रेय सोनिया गांधी को देना चाहती है। इसलिए विपक्ष के तेवर ढीले होने पर ही इस तरह का एेलान किया जा सकता है। भारतीय गणतंत्र की यह अजीब विडंबना है कि जिस पार्टी की सरकार मनमानी पर उतारू है, उसकी मुखिया ज्वलंत समस्या पर गहरी खामोशी अख्तियार किए हुए है। सरकार को यह समझना होगा कि उसके लिए विपक्ष की एकजुटता और लोगों की गहरी नाराजगी खतरे की घंटी साबित हो सकती है।
omkarchaudhary@gmail.com

4 comments:

Kaviraaj March 3, 2010 at 5:23 PM  

बहुत अच्छा । बहुत सुंदर प्रयास है। जारी रखिये ।

आपका लेख अच्छा लगा।

हिंदी को आप जैसे ब्लागरों की ही जरूरत है ।


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काजल कुमार Kajal Kumar March 3, 2010 at 7:26 PM  

महंगाई बस इलेक्शन वाले साल ही कम होती है पर इसमें तो काफी समय बाकी है न

ASHA RANI March 4, 2010 at 7:54 AM  

sarkar majboor hai, nihit swarthon ke chalte jinka apne jikr kiya, darasal manmohan aur sonia jameen se jude log nahi hain, aam admi ki dikkat inki samjh me nahi aa sakati, lekin aam admi ka chunav me kaise sadupyog(durupyog) karna hai yah inki samajh se bahar nahi hai. aap jaise kalamkar is mudde ko uthate hain to garibon ko ye rahat to milti hi hai ki koi to unki takleef samajhta hai.

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