Friday, July 17, 2009

अमर्यादित और बदले की राजनीति


पिछले सवा साल में रीता बहुगुणा जोशी तीसरी नेता हैं, जिन्हें मायावती सरकार ने बदजुबानी के आरोप में सींखचों के पीछे भेजा है। पिछले साल मार्च-अप्रैल में किसान नेता महेन्द्र सिंह टिकैत को बिजनौर में आपत्तिजनक बयान देने के आरोप में बुक किया गया था। इस साल लोकसभा चुनाव के समय पीलीभीत में भड़काऊ भाषण देने पर वरुण गांधी को गिरफ्तार किया गया और अब मुरादाबाद में मायावती के संबंध में अभद्र भाषा का प्रयोग करने पर रीता बहुगुणा जोशी को एससी एसटी अधिनियम के तहत जेल भेजा गया है। टिकैत को उनके गांव सिसौली से गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस को
जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा। कई दिन के टकराव के बाद भी शासन नाकाम रहा तो टिकैत को बिजनौर में सरेंडर का मौका दिया गया। वरुण गांधी ने सरेंडर किया तो उनके समर्थकों ने पीलीभीत में उग्र प्रदर्शन किया। नतीजतन टकराव हुआ और मायावती को वरुण पर रासुका लगाने का बहाना मिल गया। हालांकि कोर्ट के निर्देश पर न केवल वरुण रिहा हुए और उनसे रासुका भी हटी। रीता जोशी कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष हैं। भाषण देते समय उन्होंने निश्चय ही मुख्यमंत्री

मायावती के संबंध में अमर्यादित भाषा का उपयोग किया, जिस कारण उन्हें मुरादाबाद से दिल्ली लौटते समय गाजियाबाद में गिरफ्तार किया गया, लेकिन जिस तरह लखनऊ में रीता जोशी के घर को आग लगायी गयी, उससे साफ है कि मामला राजनीतिक रंजिश का बन चुका है। कांग्रेस नेत्री ने अमर्यादित भाषा का उपयोग कर कोई श्रेष्ठ उदाहरण पेश नहीं किया, लेकिन उसके बाद मायावती की पार्टी के लोगों ने जो कुछ किया है, उसे उचित कैसे ठहराया जा सकता है?
इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक दृष्टि से देखें तो बसपा-कांग्रेस के बीच टकराव के असल कारण समझ में आ जाएंगे। लोकसभा चुनाव से पहले मायावती ने राज्य में एेसी हवा बनायी कि वे पचास सीटें जीतेंगी और तब उन्हें प्रधानमंत्री बनने से कोई नहीं रोक पाएगा। उन्होंने गुंडों, माफियाओं और अपराधिक छवि के कई लोगों को टिकट दिये तो लोगों का माथा ठनका। लोगों ने उन्हें मुलायम सिंह यादव के निरंकुश शासन से तंग आकर सत्ता सौंपी थी क्योंकि माया ने तब नारा दिया था, चढ़ गुंडन की छाती पर-मोहर लगेगी हाथी पर। लोगों ने देखा कि मायावती तो खुद भी गुंडों को प्रश्रय दे रही हैं। लोकसभा चुनाव में बसपा दो दर्जन सीटें भी नहीं जीत सकीं। राहुल गांधी ने चुनाव से पहले जिस तरह दलितों के घरों में पहुंचकर भोजन और विश्राम किया, उससे कांग्रेस के प्रति दलितों के नजरिये में बदलाव आया। कांग्रेस को न केवल मुसलमानों के वोट मिले बल्कि दलितों ने भी वोट डाले। मायावती के लिये यह बड़ा राजनीतिक झटका था। मायावती जहां छिटक रहे दलितों और मुसलमानों को फिर से बसपा के साथ जोड़ने की जुगत में लगी हैं, वहीं कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश की बदली हुई राजनीतिक फिजां में अपने खोये जनाधार को पाने के लिये हाथ-पांव मार रही है। यह मायावती को नागवार गुजर रहा है।
रीता जोशी ने मुरादाबाद के एक गांव में दलित लड़कियों पर हो रहे बलात्कार के मामले में मायावती सरकार को यह कहते हुए घेरा कि डीजीपी हेलीकाप्टर की उड़ान पर सात लाख खर्च करते हैं और बलात्कार की शिकार दलित महिलाओं के परिजनों को केवल पच्चीस हजार रुपये की मदद देते हैं। इसी झोंक में वे मायावती के बारे में आपत्तिजनक शब्द कह गयीं। राजनीतिक मंचों से कई बार इस तरह के शब्द मुंह से निकल जाते हैं, जिन पर आमतौर पर सत्तारूढ़ दलों के मुखिया नोटिस भी नहीं लेते। मायावती के साथ एेसा नहीं है। वे अपनी आलोचना को पचा नहीं पातीं। यहां तो मामला अमर्यादित भाषा का भी था। सो, उन्होंने इसे कांग्रेस बनाम दलित की बेटी बनाने में देर नहीं की। उनके सिपहसलार सतीश मिश्र ने संसद को ठप्प करा दिया। नेशनल प्रेस के सामने बयान दिया कि चूकि कांग्रेस दलित विरोधी है, इसलिए रीता जोशी ने सोनिया गांधी के इशारे पर एक दलित की बेटी मायावती के खिलाफ इस तरह की भाषा का प्रयोग कर उन्हें अपमानित करने की चेष्टा की। अब सोनिया संसद में माफी मांगें। आश्चर्य की बात है की जिस भाषा का प्रयोग रीता जोशी ने किया है, ठीक उसी तरही की बातें खुद मायावती ने जनवरी २००७ में मुलायम सिंह यादव के लिए की थी. मायावती अपनी उन कटु टिप्पणियों को भूल गई.
कांग्रेस की ओर से नपे-तुले शब्दों में प्रतिक्रिया आयी। कहा गया कि रीता जोशी पहले ही उन शब्दों के लिये खेद व्यक्त कर चुकी हैं। कांग्रेस भी इस तरह के शब्दों के उपयोग को सही नहीं मानती लेकिन प्रतिक्रिया स्वरूप जिस तरह उनके घर और कारों को आग लगायी गयी, और पुलिस घंटों तक मौके पर नहीं पहुंची, उससे साफ है कि यह सब सरकार की शह पर किया गया। इस घटना से प्रदेश की राजनीति गरमा गयी है। करीब एक दर्जन सीटों पर वहां विधानसभा उप चुनाव हो रहे हैं। बसपा अब इस मामले को तूल देकर कांग्रेस को घेरने की कोशिश करेगी। कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं को सड़कों पर उतारकर संगठन को सक्रिय करेगी। समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी इसे कांग्रेस-बसपा की नूरा-कुश्ती बताकर पल्ला झाड़ लिया है। जाहिर है, इस बेवजह के विवाद के चलते राज्य की मूलभूत समस्याएं कुछ समय के लिये नेपथ्य में चली जाएंगी। यही मायावती चाहती हैं।
कांग्रेस के कुछ नेता कह रहे हैं कि रीता बहुगुणा जोशी को जिस तरह गिरफ्तार किया गया, वह सही नहीं है। वे खेद व्यक्त कर चुकी थीं। उन्हें सफाई का मौका दिया जाना चाहिए था। जब वरुण गांधी को मायावती सरकार ने लपेटा था, तब यही कांग्रेसी नेता माया सरकार की कार्रवाई को सही ठहराते नजर आ रहे थे। भड़काऊ, आपत्तिजनक और अमर्यादित बयान देने की छूट किसी को भी क्यों होनी चाहिए? वो टिकैत हों, वरुण गांधी या फिर रीता जोशी। यदि उन्होंने कानून तोड़ा है तो उन पर कार्रवाई होनी ही चाहिए। वे राजनेता हैं, इसलिये उनके प्रति नरमी दिखायी जानी चाहिए-एेसा कहने और सोचने वाले क्चया कानून के राज में विश्वास रखते हैं? हालांकि जिस तरह लोकसभा चुनाव में मायावती ने वरुण गांधी की गिरफ्तारी को वोटों में तब्दील करने की कोशिश की, उसे भी सही नहीं ठहराया जा सकता। रीता जोशी की गिरफ्तारी भी उन्होंने एससी एसटी एक्ट में करायी है। इससे लगता है कि मायावती कांग्रेस को दलित विरोधी करार देने की कोशिश करेंगी। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन राजनीतिक स्कोर के लिये इस तरह की राजनैतिक पैंतरेबाजी को सही नहीं ठहराया जा सकता। क्या यह सही समय नहीं है, जब हमारे नेता आत्मचिंतन करें कि वे किस तरह का आचरण करने लगे हैं। बाहर ही नहीं, कई बार तो संसद तक में असंसदीय शब्दों का प्रयोग किया जाता है। वैसे एक सवाल राज्य की मुख्यमंत्री मायावती से भी है कि वे रीता जोशी के घर को जलाने के कृत्य को गैर कानूनी मानती हैं या नहीं? अगर हां तो जितनी जल्दबाजी उन्होंने रीटा को गिरफ्तार करने में दिखायी है, इस मामले में क्यों नहीं दिखायी? घटना के 24 घंटे बाद भी अपराधियों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, जबकि नामजद रिपोर्ट करायी जा चुकी है?

6 comments:

अविनाश वाचस्पति July 17, 2009 at 1:17 PM  

सवाल बाकी हैं
इसीलिए तो इसे
राज नीति कहा जाता है

अंशुमाली रस्तोगी July 17, 2009 at 3:19 PM  

शायद वरुण गांधी की तरह रीता भी महान हो जाना चाहती हैं।

Udan Tashtari July 17, 2009 at 6:30 PM  

पूरा का पूरा घटनाक्रम ही अफसोसजनक, शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है.

dharmendra July 18, 2009 at 5:52 PM  

bihar ke bikhari thakur ne kha tha ki jis din bharat london ban jayega us din nanga chlna fashion ban jayega. aaj really me bharat har dristikor se badalta ja raha hai. us stithi me in rajnetao se hum kis tarah ki apecha kar sakte hain. 1990 ke pehle ke adhikansh netao ki baato ko hum kitabo me padhte hain aur usse kuch sikhte hain. lekin uske baad kaphi badlav dekha ja rha hai. hum to kahte hain pandit ne gandhi ne lohia ne jp ne chandrasekhar ne vp singh ne ye baate khi thi jo desh aur samaj ke liye behtar tha ya hai. lekin mere umra ke log ya 10-20 years me jo generation aayega unhe in netao ki baato ko batayenge. yeh gaali, badle ki rajniti, parliament me paiso ki barbadi. aaj mai apne kuch apne dosto ke saath ishi mudde par baat kar raha tha. to unhono kha ki aaj ke netao se kis tarah ki apecha karte ho.

ASHA RANI July 19, 2009 at 8:10 AM  

Maya ji ab CM hain dalit ki beti nahi. unhe isi anurup acharan karna aur alochnayon ko sahan seekhna chahiye. is parkarn ko satya ke virudh satta ka durupyog hi kaha jayega.

जगदीश त्रिपाठी July 19, 2009 at 5:22 PM  

आप की बात ठीक है। मायावती में सहनशक्ति है ही नहीं।

तकनीकी सहयोग- शैलेश भारतवासी

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