Friday, April 17, 2009

धोनी और भज्जी की अक्षम्य हरकत

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी और उनके साथी खिलाड़ी हरभजन सिंह के पद्म पुरस्कार समारोह में भाग नहीं लेने की देश भर में कड़ी आलोचना हो रही है। खेल मंत्री मनोहर सिंह गिल भी आश्चर्यचकित और नाराज हैं। उनका मंत्रालय खिलाड़ियों को नया सर्कुलर जारी कर यह दिशा-निर्देश देने की तैयारी कर रहा है कि भविष्य में कोई भी खिलाड़ी पद्म पुरस्कारों का इस तरह निरादर नहीं करेगा और न ही उन्हें लेने के लिए अपने बजाय किसी और को भेजेगा। पिछले साल धोनी को खेल रत्न पुरस्कार से नवाजा गया था लेकिन उसे लेने के लिए भी वह नहीं गए थे। हालांकि टीम इंडिया तब श्रीलंका के दौरे पर थी, तो भी यह माना जा रहा है कि वह एक दिन का समय निकालकर राष्ट्रपति भवन पहुंच सकते थे।
खिलाडियों में यह प्रवृति बढती जा रही है कि पदम् और खेल रत्ना जैसे उन प्रतिष्ठित पुरस्कारों को लेने के लिए भी वे अपने परिवार के किसी सदस्य को भेज देते हैं, जिन्हें खुद राष्ट्रपति प्रदान करती हैं. ऐसे खिलाडियों को अमिताभ बच्चन, माधुरी दीक्षित, अभिनव बिंद्रा और सचिन तेंदुलकर जैसे नामचीन सितारों से कुछ सीख लेनी चाहिए, जो सपरिवार उन्हें ग्रहण करने राष्ट्रपति भवन पहुंचे. माधुरी दीक्षित सात समंदर पार अमेरिका से उड़ान भरकर नई दिल्ली पहुंची तो अभिनव बिंद्रा ने टिपण्णी कि अगर उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिले तो वे भले ही दुनिया के किसी भी कोने में हों, उसे प्राप्त करने के लिए जरूर पहुँच जाएँगे. कोई भी खिलाडी अथवा कलाकार किसी देश, खेल अथवा उस संस्था से बड़ा नहीं हो सकता, जो उसे राष्ट्रीय सम्मान से अभिनंदित कर रही है, इस तरह के पुरस्कारों को नहीं लेने जाना राष्ट्रपति का भी निरादर है.
इस बार पद्म पुरस्कारों के लिए दो समारोह आयोजित किए गए। धोनी और हरभजन दोनों ही अवसरों पर नहीं पहुंचे। पहले समारोह के समय उनकी अनुपस्थिति समझ में आती है। वे दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर थे, लेकिन दूसरे समारोह के समय तो दोनों देश में ही थे। यह और भी दुखद है कि इन दोनों ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में जाने के बजाय उस दिन और उसके अगले दिन विज्ञापन फिल्मों की शूटिंग में भाग लेने का तरजीह दी। इस पूरे प्रकरण पर अभी तक धोनी ने सफाई भी देना मुनासिब नहीं समझा है जबकि बेजा हरकतों के लिए अक्चसर सुर्खियों में रहने वाले हरभजन सिंह यह कहकर पद्म पुरस्कारों और लोगों की नाराजगी के प्रति फिर से निरादर का भाव प्रस्तुत किया कि समारोह में न जाकर उन्होंने कोई गलती नहीं की है। अगर कोई एेसा मानता है तो अगली बार जब उन्हें कोई एेसा पुरस्कार मिलेगा तो वे दो दिन पहले ही वहां (राष्ट्रपति भवन) जाकर बैठ जाएंगे। इस तरह के बयान से साफ है कि पिछले कुछ महीनों की टीम की कामयाबी ने क्रिकेट खिलाड़ियों के दिमाग खराब कर दिए हैं। न उन्हें इसका अहसास है कि वे क्या कह रहे हैं और न इसकी परवाह कि जिस तरह का रवैया वे अपना रहे हैं, उस पर देशवासी और उनके प्रशंसक क्या सोचेंगे? यह और भी आश्चर्य की बात है कि बीसीसीआई खिलाड़ियों के इस व्यवहार पर कड़ा रुख अपनाने के बजाय उनका बचाव करती दिख रही है। इस पर बहस होनी ही चाहिए कि जिन पुरस्कारों को राष्ट्रपति के हाथों प्राप्त करने का हर भारतीय का स्वप्न होता है, उसके प्रति यदि बद-दिमाग किस्म के खिलाड़ी इस तरह का रवैया अपनाएं तो आगे से उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार दिए ही नहीं जाएं। थोड़ी सी कामयाबी से ही कमीज के कालर खड़े कर लेने वाले भज्जी जैसे खिलाड़ियों को सचिन तेंदुलकर से सीख लेनी चाहिए, जो पिछले साल पद्म पुरस्कार प्राप्त करने के लिए सपरिवार राष्ट्रपति भवन के आलीशान अशोक हाल पहुंचे थे। सचिन आज भी इन सबसे अधिक विज्ञापन करते हैं, लेकिन उन्होंने राष्ट्रीय सम्मान पर कभी धन-दौलत और विज्ञापन अनुबंधों को इस तरह तरजीह नहीं दी।

ओमकार चौधरी
omkarchaudhary@gmail.com

3 comments:

suntel April 17, 2009 at 2:49 PM  

Relly dhoni and bhajji has dishonoured the National prestigious awards.

Both thing themself as cricketer (businessman) and sportsman second, so they did their businessman duty. For this dishonour responsible is media, public which are giving more and more extra honour, coverage to cricketers. Action should be taken against the authorities who have selected the cricketers for these awards. In India hundreds of other sports are there which should also be given importance.

dharmendra April 17, 2009 at 5:08 PM  

sachin ki tulna inlogo se nahi ki ja sakti. sachin is really great. inke helmet ke uper laga tiranga inki soch ko darsata hai. dhoni ne really me galat kiya hai. agar we nahi aa sakte the to inform to kar sakte the.

nirmal gupt April 18, 2009 at 12:53 PM  

धोनी और भज्जी का पद्म पुरस्कार लेने न आना यही बताता है कि क्रिकेट खिलाडिओं की यह नई जमात राष्ट्रीय पुरस्काओं को अहमियत नहीं देते ,वैसे भी क्या भज्जी इस पुरस्कार के पात्र थे .थप्पड़ कांड के बाद भी ......

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पहले पेट पूजा.. फिर काम दूजा


फोटो : दीप चन्द्र तिवारी

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