Tuesday, April 28, 2009

बोफोर्स आज भी बड़ा मुद्दा

शहर भी उनका। अदालत भी उनकी। मुंसिफ भी वही। मुझे पता है-मेरा कसूर निकलेगा। इसे आज के परिपेक्ष्य में यूं भी कह सकते हैं-सरकार भी उनकी। कानून मंत्रालय भी उनका। सीबीआई भी उनकी। अटार्नी जनरल भी उनका। मुझे पता है-बोफोर्स में दलाली खाने वाले इतालवी व्यापारी ओत्तावियो क्वात्रोक्की का कुछ नहीं बिगड़ेगा। और एेसा ही होता नजर आ रहा है। केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इंटरपोल से कहा है कि बोफोर्स तोप मामले में अभियुक्त ओत्तावियो क्वात्रोक्की का नाम रेड कार्नर नोटिस सूची से हटा दिया जाये। भारत के कहने पर ही क्वात्रोक्की का नाम बारह साल पहले रेड कार्नर नोटिस में डाला गया था। सीबीआई 30 अप्रैल को कोर्ट के समक्ष यह अपील करने जा रही है। सीबीआई के प्रवक्ता की मानें तो एजेंसी ने एटार्नी जनरल मिलान बैनर्जी से सलाह लेने के बाद ही यह फैसला लिया है। करीब 21 साल पहले यह बात सामने आयी थी कि स्वीडन की हथियार कंपनी बोफोर्स ने भारतीय सेना को तोपें सप्लाई करने का सौदा हथियाने के लिये 80 लाख डालर की दलाली चुकायी थी। उस समय केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी, जिसके प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। स्वीडन की रेडियो ने सबसे पहले 1987 में इसका खुलासा किया।
आरोप था कि राजीव गांधी परिवार के नजदीकी बताये जाने वाले इतालवी व्यापारी ओत्तावियो क्वात्रोक्की ने इस मामले में बिचौलिये की भूमिका अदा की, जिसकी एेवज में उसे दलाली की रकम का बड़ा हिस्सा मिला। कुल चार सौ बोफोर्स तोपों की खरीद का सौदा 1.3 अरब डालर का था। आरोप है कि स्वीडन की हथियार कंपनी बोफोर्स ने भारत के साथ सौदे के लिए 1.42 करोड़ डालर की रिश्वत बांटी थी। काफी समय तक राजीव गांधी का नाम भी इस मामले के अभियुक्तों की सूची में शामिल रहा लेकिन उनकी मौत के बाद नाम फाइल से हटा दिया गया। सीबीआई को इस मामले की जांच सौंपी गयी लेकिन सरकारें बदलने पर सीबीआई की जांच की दिशा भी लगातार बदलती रही। एक दौर था, जब जोगिन्दर सिंह सीबीआई चीफ थे तो एजेंसी स्वीडन से महत्वपूर्ण दस्तावेज लाने में सफल हो गयी थी। जोगिन्दर सिंह ने तब दावा किया था कि केस सुलझा लिया गया है। बस, देरी है तो क्वात्रोक्की को प्रत्यर्पण कर भारत लाकर अदालत में पेश करने की। उनके हटने के बाद सीबीआई की चाल ही बदल गयी। इस बीच कई एेसे दांवपेंच खेले गये कि क्वात्रोक्की को राहत मिलती गयी। दिल्ली की एक अदालत ने हिंदुजा बंधुओं को रिहा किया तो सीबीआई ने लंदन की अदालत से कह दिया कि क्वात्रोक्की के खिलाफ कोई सबूत ही नहीं हैं। अदालत ने क्वात्रोक्की के सील खातों को खोलने के आदेश जारी कर दिये। नतीजतन क्वात्रोक्की ने रातों-रात उन खातों से पैसा निकाल लिया।
2007 में रेड कार्नर नोटिस के बल पर ही क्वात्रोक्की को अज्रेटिना पुलिस ने गिरफ्तार किया। वह बीस-पच्चीस दिन तक पुलिस की हिरासत में रहा। सीबीआई ने काफी समय बाद इसका खुलासा किया। सीबीआई ने उसके प्रत्यर्पण के लिए वहां की कोर्ट में काफी देर से अर्जी दाखिल की। तकनीकी आधार पर उस अर्जी को खारिज कर दिया गया, लेकिन सीबीआई ने उसके खिलाफ वहां की ऊंची अदालत में जाना मुनासिब नहीं समझा। नतीजतन क्वात्रोक्की जमानत पर रिहा होकर अपने देश इटली चला गया। पिछले बारह साल से वह इंटरपोल के रेड कार्नर नोटिस की सूची में है। सीबीआई अगर उसका नाम इस सूची से हटाने की अपील करने जा रही है तो इसका सीधा सा मतलब यही है कि कानून मंत्रालय, अटार्नी जनरल और सीबीआई क्वात्रोक्की को बोफोर्स मामले में दलाली खाने के मामले में क्लीन चिट देने जा रही है। चूकि चुनाव का समय है, इसलिये कांग्रेस के विरोधी इस मामले को सस्ते में निपटने नहीं देंगे। विपक्ष के नेता लाल कृष्ण आडवाणी, माकपा महासचिव प्रकाश करात, उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती सहित कई शीर्षस्थ नेताओं के तीखे बयान आ चुके हैं। आडवाणी ने साफ कहा कि इस कदम से साफ हो गया है कि यूपीए सरकार को चुनाव में अपनी वापसी का भरोसा नहीं रह गया है। पिछले पांच साल में सीबीआई के राजनीतिक दुरुपयोग के लिये उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को दोषी ठहराने में गुरेज नहीं किया।
हालांकि गौर करने वाली बात यह भी है कि 1998 से 2004 तक छह साल केन्द्र में भाजपा की सरकार भी रही। नब्बे के दशक में वी पी सिंह, चंद्रशेखर, एचडी देवेगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल भी गैर कांग्रेसी सरकारों के प्रधानमंत्री के तौर पर सत्तानशीं रहे, लेकिन कोई भी सरकार इस चालाक इतालवी व्यापारी को अर्जेटीना और मलेशिया से प्रत्यर्पित कर भारत लाने में सफल नहीं हो सके। इसलिए कपिल सिब्बल कांग्रेस सरकार और सीबीआई का बचाव करते हुए यदि लाल कृष्ण आडवाणी पर यह कहते हुए निशाना साधते हैं कि जब उनकी सरकार थी, तब वे क्वात्रोक्की के खिलाफ कोई सबूत क्यों नहीं ला सके तो उनका तर्क भी समझा जा सकता है। ठीक लोकसभा चुनाव के बीच बोफोर्स दलाली से जुड़े इस प्रकरण में नये सिरे से उबाल आ गया है। प्रमुख विपक्षी दलों भारतीय जनता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए फिर गोला दाग दिया है कि अपने राजनीतिक हित साधने के लिए मनमोहन सरकार ने फिर सीबीआई का दुरुपयोग किया है।
यह जानते-समझते हुए कि लोकसभा के चुनाव चल रहे हैं और विपक्षी दल इसे मुद्दा बनाने से नहीं चूकेंगे, सरकार और सीबीआई ने इंटरपोल से क्वात्रोक्की का नाम मोस्ट वांटेड सूची से हटाने की अपील करने का निर्णय क्यों किया, यह समझने की जरूरत है। आश्चर्य की बात है कि कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज और सीबीआई के प्रवक्ता एेसी सफाई दे रहे हैं, जो किसी के गले आसानी से नहीं उतर सकती। भाजपा कह रही है कि कांग्रेस को चुनाव में अपनी हार का अहसास हो गया है, इसलिए सत्ता हाथ से जाने से पहले वह अपने मित्रों को क्लीन चिट देना चाहती है। सरकार ने यह फैसला एेसे समय किया है, जब चुनाव चल रहे हैं। इसलिए कांग्रेस भाजपा व विपक्षी दलों के पलटवार पर बचाव की मुद्रा में आ गयी है। क्वात्रोक्की प्रकरण में सीबीआई की भूमिका संदिग्ध बन गई है। साफ-साफ दिखायी दे रहा है कि उसने नयी सरकार के गठन से कुछ ही समय पहले किसी के इशारे पर यह कदम उठाया है, जिनसे क्वात्रोक्की को कानूनी लाभ मिल सके और वह पूरी दुनिया में जहां चाहे, स्वच्छंद तरीके से घूम-फिर सके।
जाहिर है, विपक्ष इसे आसानी से हाथ से नहीं जाने देगा। अभी दो चरण का मतदान पूरा हुआ है। तीन चरणों का शेष है। यह एेसा मसला है, जिस पर 1989 में राजीव गांधी की सरकार चली गयी थी। वीपी सिंह हीरो के तौर पर उभरे थे। यह अलग बात है कि उनकी सरकार भी बोफोर्स दलाली का सच सामने लाने में विफल रही थी। बाद में भी समय-समय पर यह मुद्दा देश में राजनीतिक तूफान लाता रहा। इस प्रकरण के सामने आते ही जिस तरह की राजनीतिक हलचल शुरू हुई, उससे साफ है कि बोफोर्स दलाली आज भी भारत में बड़ा राजनीतिक मुद्दा है। कांग्रेस को चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
ओमकार चौधरी
omkarchaudhary@gmail.com

2 comments:

Hari Joshi April 28, 2009 at 7:52 PM  

बोफोर्स अब मुद्दा नहीं हैं। इसे विपक्ष अपनी हैसियत से ज्‍यादा भुना चुका है।..दुर्भाग्‍य ये है कि आज भी सभी दल और मीडिया आज भी जीत-हार के चर्चा मतों का जातियों में विभाजन कर करते हैं। जातिवाद ने सभी मुद्दों को बौना बना दिया है। दुर्भाग्‍यपूर्ण हो।

shiv sagar May 2, 2009 at 2:46 PM  

Sir, it’s nice to speak on such issue but result is Zero, it’s a dilemma of our country in present perspective. Such big issue not only bother single person but shakes entire Nation. But keep on converse over shaking values.
--Kindly visit your old well-wisher too I invite you. Your shiv sagar, Meerut

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फोटो : दीप चन्द्र तिवारी

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